बरसात बरसे तो आफत ना बरसे तो आफत। बरसात बरसे तो आफत ना बरसे तो आफत।
बहुत से लोग इन्हें समझते हैं एक समस्या लेकिन यह तो कर रहे होते हैं बड़ी ही तपस्या। बहुत से लोग इन्हें समझते हैं एक समस्या लेकिन यह तो कर रहे होते हैं बड़ी ही तपस...
प्रकृति की धानी चुनर को ओढ़ धरा यूं खिली हुई है सूरज की किरणों के संग में लालिमा ज् प्रकृति की धानी चुनर को ओढ़ धरा यूं खिली हुई है सूरज की किरणों के संग में...
ये बात केवल अगस्त की है त्योहार तो पूरे साल चलते ये बात केवल अगस्त की है त्योहार तो पूरे साल चलते
इस कविता मे धरती का महबूब उसे उसकी हुई बुरी हालत से रूबरू करवा रहा है... इस कविता मे धरती का महबूब उसे उसकी हुई बुरी हालत से रूबरू करवा रहा है...
गीत ग़ज़ल उल्फ़त की ख़ुशबू है आज़म महके प्यारी धरती उल्फ़त की धुन में। गीत ग़ज़ल उल्फ़त की ख़ुशबू है आज़म महके प्यारी धरती उल्फ़त की धुन में।